HAY! RE PANCHALI
क्या कभी किसी कविता ने आपको सिर्फ भावुक नहीं, बल्कि बेचैन भी किया है? “हाय! रे पांचाली” ऐसी ही कविताओं और गद्य-चिंतन का संग्रह है, जो पाठक को प्रेम, समाज, सत्ता और आत्मा के गहरे सवालों से रूबरू कराता…

Doubt. Think. Infer. Evolve.

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क्या कभी किसी कविता ने आपको सिर्फ भावुक नहीं, बल्कि बेचैन भी किया है? “हाय! रे पांचाली” ऐसी ही कविताओं और गद्य-चिंतन का संग्रह है, जो पाठक को प्रेम, समाज, सत्ता और आत्मा के गहरे सवालों से रूबरू कराता…